खाद की किल्लत से जूझते किसान, रात को होती काला बाजारी , किसान परेशान दुकानदार हो रहे मालदार

विशाल विचार
शेखर सिद्दीकी ब्यूरो चीफ फतेहपुर की रिपोर्ट

एक ओर किसान खेतों में बुआई के लिए यूरिया खाद की कमी से बेहाल हैं, समितियों पर घंटों लाइन लगाने के बाद भी मायूस लौट रहे हैं। वहीं दूसरी ओर जनपद के कस्बो से लेकर गांवों तक खुलेआम काला बाजारी का गोरखधंधा चल रहा है। रात के अंधेरे में दुकानदार खुलेआम महंगे दामों पर खाद बेच रहे हैं और किस लेने के लिए मजबूर हो रहा है किसानों का आरोप है कि दुकानदार यूरिया में सल्फर–जिंक मिलाकर 500 रुपये प्रति बोरी किसानों से ठग रहा है। हालात यह हैं कि “बिना आधार कार्ड के जितनी बोरी चाहिए ले जाओ”— जैसे मानो दुकानदारों नए सिस्टम को पूरी तरह से अपने बस में कर कालाबाजारी के रोज नए रिकॉर्ड कायम कर रहा है।किसानों का कहना है कि यह खेल कृषि विभाग की नाक के नीचे उसकी शह पर ही फल-फूल रहा है। सवाल यह है कि जब समितियों में खाद उपलब्ध नहीं है तो इस ट्रेडर्स के पास इतनी बोरियां आखिर आई कहां से? किसानों का सीधा आरोप है कि विभागीय जिम्मेदार अधिकारियों की जुगत और मिलीभगत के बिना इतनी बड़ी आपूर्ति संभव ही नहीं वही जनपद के किसानो ने आक्रोश जताते हुए कहा
“दिनभर लाइन लगाने पर भी खाद नहीं मिलती, लेकिन रात होते ही 500 रुपये में बोरी मिल जाती है। इस लूट के पीछे विभागीय जिम्मेदारी और सिस्टम ही काम कर रहा है । और कृषि विभाग की चुप्पी ही सबसे बड़ा सबूत है।”किसानों का कहना है कि समितियों में जहां किसान धक्के खा रहे हैं, वहीं प्राइवेट दुकानदार के पास बोरियों का अंबार कैसे खड़ा है? क्या प्रशासन और विभागीय अफसर जानबूझकर आँखें मूँदे बैठे हैं? किसान सवाल कर रहे हैं—
“जब सरकारी गोदामों में खाद नहीं है तो आखिर ये बोरी किसके आशीर्वाद से इन दुकानों तक पहुंच रही हैं?”
किसानों ने जिला प्रशासन से इस ब्लैक मार्केटिंग की तत्काल जांच कर दोषियों को कठोर दंड देने की मांग की है। किसानों का कहना है कि अगर प्रशासन ने जल्द कार्रवाई नहीं की तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। जनपद के हर कस्बे की खाद की दुकानों का यही हाल है ।जहां खाद रात को ऊंचे दामों में बेची रही है । और किसान महंगी खाद खरीदने को मजबूर है । क्योंकि उसके धान , गन्ना, मिर्च, मकाई, और अन्य फसलों को इस वक्त खाद की आवश्यकता है । वही तिलहन की अगेती फसलों की बुआई का टाइम भी आगया उसमें भी खाद की आवश्यकता है । किसानों ने रोष प्रकट करते हुए कहा कि अगर खाद की यही किल्लत रही तो हम लोग आंदोलन को बाध्य हो कर मुख्यालय में आलाअधिकारियों के यह धरना दे कर उनका घेराव करेंगे ।

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