पीएम मोदी के अमेरिका दौरे से पहले जयशंकर की रूस पर दो टूक

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मंगलवार को छह दिन की आधिकारिक विदेश यात्रा शुरू करेंगे.

20 जून से शुरू होकर 25 जून तक चलने वाले इस दौरे पर पीएम मोदी शुरुआत के तीन दिन अमेरिका और शेष दो दिन मिस्र में रहेंगे.

मोदी इससे पहले कई बार अमेरिका जा चुके हैं लेकिन स्टेट विज़िट यानी राजकीय यात्रा के तौर पर यह उनका पहला दौरा है.

इससे पहले साल 2009 में आख़िरी बार भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह स्टेट विज़िट पर अमेरिका गए थे.

‘अमेरिका से लगातार मज़बूत होते संबंध’ :

भारत-अमेरिका के संबंधों से जुड़े सवाल पर जयशंकर का कहना है कि दोनों देशों के बीच संबंध सही रास्ते पर हैं और बहुत तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं.

जयशंकर ने कहा, ”पिछले दो दशकों में दोनों के बीच संबंध हर दिन बेहतर हो रहे हैं लेकिन पिछले एक दशक में इन संबंधों ने वास्तव में गति पकड़ी है.”

”पिछले दो दशकों में अमेरिका में चार राष्ट्रपति रहे हैं जो एक दूसरे से काफ़ी अलग थे. फिर भी भारत के साथ संबंध मज़बूत करने की प्रतिबद्धता को लेकर उनमें मतभेद नहीं थे.”

”भारत की बात करें तो इस दौरान (पिछले दो दशक) यहां दो सरकारें रही हैं. मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि हमें इस रिश्ते को आगे ले जाने और वजन देने के लिए बहुत संकोच नहीं करना पड़ा.”

‘मनमोहन सरकार में झिझक थी’

दोनों देशों के बीच सैन्य-प्रौद्योगिकी सहयोग बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण रक्षा समझौतों पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है.

इन रक्षा समझौतों को लेकर जयशंकर से सवाल पूछा गया.

जवाब में जयशंकर ने कहा कि मनमोहन सरकार की झिझक के कारण दोनों देशों का रक्षा सहयोग आगे नहीं बढ़ पाया लेकिन अब चीज़ें बदल गई हैं.

जयशंकर ने कहा, ”प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के दौरान पिछली बीजेपी सरकार में कुछ तरक्की हुई थी. इसके बाद मनमोहन सरकार के समय परमाणु समझौता हुआ था. लेकिन इसके आगे जो क़दम उठाने चाहिए थे वो नहीं उठाए गए क्योंकि उस समय की सरकार में झिझक थी.”

”साल 2015 के बाद चीज़ें बदल गईं. पिछले एक दशक से ऐसी सरकार है, जिसमें वैचारिक झिझक नहीं है. इसलिए आप देखेंगे कि हमारे संबंध और अधिक सुचारू रूप से आगे बढ़ रहे हैं.”

जयशंकर कहते हैं, ”1965 से मौटे तौर पर देखें तो 40 सालों तक अमेरिका से भारत को कोई महत्वपूर्ण सैन्य बिक्री नहीं हुई थी.

लेकिन आज हम तीन अमेरिकी विमान पी-8, सी-130 और सी-17 का इस्तेमाल कर रहे हैं. हम चिनूक और अपाचे जैसे कई हेलिकॉप्टरों का इस्तेमाल कर रहे हैं. साथ ही हमारे पास कुछ अमेरिकी तोपें भी हैं.”

जयशंकर का मानना है कि टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में आज भारत के अमेरिका के साथ जैसे संबंध हैं वैसे किसी दूसरे देश के नहीं हैं और व्यापार के साथ निवेश लगातार बढ़ रहा है.

‘रूस के साथ रिश्ते ज़रूरी’

इंटरव्यू के दौरान जयशंकर से रूस के साथ रिश्तों को लेकर भी सवाल पूछा गया.

सवाल था कि उन अमेरिकी और यूरोपीय लोगों से जयशंकर क्या कहेंगे जो रूस-यूक्रेन युद्ध के समय भारत और रूस के संबंधों की आलोचना कर रहे हैं.

जयशंकर ने जवाब दिया कि रूस के अच्छे संबंध बनाए रखना ज़रूरी है.

जयशंकर ने कहा, ”अमेरिकी सांसद भी इस बात को समझते हैं कि रूस के साथ भारत के संबंध 60 सालों के इतिहास का परिणाम है. और 60 साल के इतिहास के बाद ऐसा नहीं है कि मैंने अपने विचार बदल लिए हैं.”

”अमेरिका ने 1965 के बाद भारत को हथियार नहीं बेचने का फ़ैसला किया था, हमारे पास वास्तव में सोवियत संघ जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं था.

अब, ऐसा नहीं हो सकता कि आपको जो पसंद है, उसके कारण हमें फ़ैसला लेना पड़ा और अब आपको इससे समस्या है. यह एक वास्तविकता है जिसके साथ आपको रहना है.”

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